~ एक स्त्री कभी खाली नहीं होती ~
एक स्त्री कभी खाली नहीं होती,
वो सदैव भरी होती है संभावनाओं से,
मन से, शरीर से, विचार से संस्कार से,
विरह से, संसर्ग से, वियोग से, प्यार से,
भरी ही रहती है वह...
अपने खालीपन से, पुरुषत्व से,
दैनिक व्यापर से, अपनत्व से,
सूक्ष्मता से, अपने ब्रह्मत्व से,
आस-पास कि निजता से, उसके अपनों के स्वत्व से,
भरी रहती है वह...
एक स्त्री कभी खाली नही रह सकती,
उस में पल रहे होते हैं, कितने ही संसार,
एक किनारे पर सृजन और आँचल में ध्वंस बाँधे,
वह करती है जाने कितनी ही बाधायें पार,
सधी सी रहती है वह...
एक स्त्री कभी खाली नही बैठती।
उसके अंदर चल रहा होता है एक बवण्डर,
आशा का, निराशा का, जिज्ञासा का,
और कुछ अधूरी ही रहती पिपासा का...
पूरी से होती है वह...
एक स्त्री कभी मौन नही रहती,
उसके अन्दर चल रहा होता है संवाद,
किसी अनमिली सखी से, इष्ट से, जगत से,
उमड़ते से, मुखर रहते हैं विचार अनगिनत से...
स्वयं को सम्बोधित करती है वह...
एक स्त्री कभी समय व्यर्थ नही करती,
उसकी निर्द्वन्द्व आँखों में पल रहे होते हैं और
वो संजो रही होती है शाम, भविष्य और अपनों को,
अपने छोड़ पूरी करने में लगी दूसरों के सपनों को...
बस व्यस्त रहती है वह...
एक स्त्री कभी खाली नहीं होती...
#स्त्री
#भईया_उवाच्
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