तो क्यूँ ये हिचकिचाहट
कुछ तो फर्क है, कुछ कमी और सब कुछ होने में।।
कुछ तो फर्क है सब पाने और कुछ खो देने में।।
कुछ तो फर्क है सोते रहने और एक सपना बोने में।।
कुछ तो फर्क है जिंदा होने और सचमुच जी लेने में।।
कुछ तो फर्क है अकेले पड़े रहने और किसी को अपना बना लेने में।।
कुछ तो फर्क है खुद खुश रहने और दूसरे के आंसू मिटाने में ।।
कुछ तो फर्क है अपनी खुशियाँ संजोने और कुछ मुस्कुराहटें बाँट लेने में।।
जब अंदाजा है इतना इस फर्क का इस कदर...
तो क्यूँ ये हिचकिचाहट,
बढ़ते हैं आगे...
बढाते हैं हाथ...
उठाते हैं दायित्व...
थामते हैं कुछ हाथ...
पोछते हैं कुछ आंसू...
बाँटते हैं कुछ खुशियाँ...
फैलाते हैं कुछ मुस्कुराहटें...
बोते हैं कुछ अरमान...
संजोते हैं कुछ सपने...
'करते हैं कुछ'...
'कर दिखाते हैं कुछ' !!
#BhaiyaSpeaks
#BhaiyaSpeaks
Wonderful !
ReplyDeleteKuch to fark hai....!!!!
ReplyDeleteWell written Sir...
Shukriya !! :)
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