तुम लिखो
सावन और चढ़ते यौवन के बारे में,
हम तो सूखे और खोते बचपन की ही सुध लेंगे |
हम तो सूखे और खोते बचपन की ही सुध लेंगे |
तुम रहो करते महिमामंडित अग्नि और सूर्य को,
हम तो अंधेरों से ही अपनी राह निकालेंगे |
हम तो अंधेरों से ही अपनी राह निकालेंगे |
तुम करते रहो उस हरियाली का यशगान,
हम तो बंजर के साथ रह, उसे सम्हालेंगे |
हम तो बंजर के साथ रह, उसे सम्हालेंगे |
तुम गिन-गिन कर खुश हो लो अट्टालिकाओं की
सीढियां,
हम तो उनके कमरों की दरी में अपने जवाब तलाशेंगे |
हम तो उनके कमरों की दरी में अपने जवाब तलाशेंगे |
तुम
करो अभिषिक्त उस नए दिन के उजाले को,
हम इन स्याह रातों को अपना प्रकाश-स्तम्भ बना लेंगे |
हम इन स्याह रातों को अपना प्रकाश-स्तम्भ बना लेंगे |
तुम
बन कृपा पात्र हर सुख का रसपान करो,
हम विषमता के गरल को हँस के गले उतारेंगे |
हम विषमता के गरल को हँस के गले उतारेंगे |
तुम रहो चूर मद में उनकी उधार की सफलताओं के,
हम दे साथ संघर्षों का, उनकी नाव पार लगावेंगे |
हम दे साथ संघर्षों का, उनकी नाव पार लगावेंगे |
तुम रहो जकड़े, पकडे,
उन आशाओं की पूंछ,
हम निराशा को धकेल पीछे, सूरज नए उगा लेंगे |
हम निराशा को धकेल पीछे, सूरज नए उगा लेंगे |
तुम ख़ुशी
से भटको उन मखमली गलियारों में,
हम भरसक इन कंटीली वास्तविकताओं को सम्हालेंगे |
हम भरसक इन कंटीली वास्तविकताओं को सम्हालेंगे |
तुम नहाओ विदेशी मदिरा में, करो
व्यसन,
हम इस मुफ्त चांपाकल से अपनी प्यास बुझा लेंगे |
हम इस मुफ्त चांपाकल से अपनी प्यास बुझा लेंगे |
तुम करो स्थापित उनकी नयी चतुराई को,
हम इनकी सरलता में खुद को पा लेंगे |
हम इनकी सरलता में खुद को पा लेंगे |
हो तुम्हे गर्व उनकी उस सतत् ऊँचाई
पर,
हम इनकी सतह के किस्सों में गोते खा लेंगे |
हम इनकी सतह के किस्सों में गोते खा लेंगे |
वो बढें, तुम फलो-फूलो, यही
चलता रहे,
हम इनको जिंदा रखने में जान लगा देंगे |
हम इनको जिंदा रखने में जान लगा देंगे |
तुम बने रहो चमक-दमक के साथी,
हम दियों की रौशनी में इन्हें जीना सिखा लेंगे |
हम दियों की रौशनी में इन्हें जीना सिखा लेंगे |
तुम लिखो
सावन और चढ़ते यौवन के बारे में,
हम तो सूखे और खोते बचपन की ही सुध लेंगे |
हम तो सूखे और खोते बचपन की ही सुध लेंगे |