कम्पनी रूल : भाग -02
उसके
बाद कुछ दिन धाक रही माता जी की, कोई भी चूँ तक न करता उनके आगे| पर धीरे-धीरे कुछ नए और छुटभैये व्यापारी आये दिन कोई न कोई दिक्कत पैदा करते
रहते| माता जी से सहन न होता| तो एक दिन उन्होंने बाज़ार की चहारदीवारी पर
काँटेदार तार लगवा दिये| अब कोई ज्यादा चूँ-चपड़ नहीं कर सकता था| छोटे व्यापारियों में से एक थोडा पढ़ा-लिखा
था, जा कर न्यायलय से आदेश ले आया कि माता
जी की मनमानी नहीं चलेगी| फिर एक-एक कर के
सबने बाज़ार में अपनी मनमानी की| माता जी
कुछ दिन शांत रहीं, फिर जब रहा न गया तो सामने आ कर दोबारा ख़लीफ़ाई
सम्भाली| इस बीच माता जी के दोनों बेटे बड़े हो रहे थे और वो नहीं चाहती थीं कि इस बाज़ार के तीन-पाँच में उनके बच्चे पड़ें तो
उनको विलायत भेज दिया था | जब लौट कर आये
तो दोनों ने शादी की| बड़े ने विदेशी
से और छोटे ने देसी से |
बड़े बेटे को कोई दिलचस्पी नहीं थी गल्ले में | खाने-खेलने भर को था ही और वो अपने शौक, सैर-सपाटों में मशगूल
रहता|
छोटा फिर भी थोड़ा ठीक था| माँ का हाथ बँटाता, और व्यापर को कैसे दुरुस्त किया जाए, आने वाले समय के लिए कैसे मुलाज़िमों को तैयार
किया जाए, क्या तरक़ीब
हो कि बाकी बराबरी न कर सकें, इसी
सब में उसके दिन-रात गुज़रते| उसके काम
करने का तरीका कुछ अलग ही था| उसने हर काम के लिए एक अलग आदमी सहेज रखा था |
जो जितना ज़्यादा ख़ास उसको उतना संजीदा काम| इस सब के बीच आम खरीदार
से दूरी बढाती गयी| बस ये ख़ास लोग
ही माता जी और छोटे बेटे तक पहुँच पाते थे और ज़रूरी नहीं कि बाहर चल रहा भाव ही अन्दर
बताएं| इन ख़ास लोगों की अपनी-अपनी उपाधि
थी| कोई लाइसेंस वाला था, कोई लाइज़नर,
कोई पट्टा वाला तो कोई कोटेदार, कोई रियासत वाला तो कोई सियासतदार| इन सब के आस-पास रहते एक महफ़िल सी थी| माता जी दूरदर्शी थीं और वयापार में भविष्य
अनिश्चित जानते हुए उन्होंने अब एक कंपनी बना दी थी| सभी क़रीबी-ख़ास लोगों को कद के मुताबिक़ ओहदा दिया गया था और छोटा बीटा
इन लोगों से हिसाब-किताब करता था| फिर एक
दिन यकायक उसकी एक दुर्घटना में मौत हो
जाती है| गलती किसकी थी, उसमें जायेंगे तो समस्या होगी| चश्मदीद कहते हैं कि
माता जी इतने मज़बूत दिल की थीं कि बेटे के जाने पर भी एक आँसू न टपका|
फिर कुछ समय बाद माता जी भी परलोक सिधार गयीं| कारण में जायेंगे तो पूरे पंजाब की नदियाँ सूख जाएँगी, जाने दीजिये|
#भईया_उवाच
#कम्पनी_रूल
#कम्पनी_रूल
No comments:
Post a Comment