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Sunday, 11 August 2019

कम्पनी रूल : भाग -02


कम्पनी रूल : भाग -02

 उसके बाद कुछ दिन धाक रही माता जी की, कोई भी चूँ तक  न करता उनके आगे|  पर धीरे-धीरे कुछ नए और छुटभैये  व्यापारी आये दिन कोई न कोई दिक्कत पैदा करते रहते|   माता जी से सहन न होता|  तो एक दिन उन्होंने बाज़ार की चहारदीवारी  पर  काँटेदार  तार लगवा दिये|  अब कोई ज्यादा चूँ-चपड़  नहीं कर सकता था|   छोटे व्यापारियों में से एक थोडा पढ़ा-लिखा था,  जा कर न्यायलय से आदेश ले आया कि माता जी की मनमानी नहीं चलेगी|  फिर एक-एक कर के सबने बाज़ार में अपनी मनमानी की|  माता जी कुछ दिन  शांत रहीं,  फिर जब रहा न गया तो सामने आ कर दोबारा  ख़लीफ़ाई  सम्भाली|  इस बीच माता जी  के दोनों बेटे   बड़े हो रहे थे और वो नहीं चाहती थीं कि  इस बाज़ार के तीन-पाँच में उनके बच्चे पड़ें तो उनको विलायत भेज दिया था |  जब लौट कर आये तो दोनों ने शादी की|  बड़े ने विदेशी से  और छोटे ने  देसी से |  बड़े बेटे को कोई दिलचस्पी नहीं थी गल्ले में |  खाने-खेलने  भर को था ही और वो अपने शौक, सैर-सपाटों में मशगूल  रहता|  छोटा फिर भी थोड़ा  ठीक था|  माँ का हाथ बँटाता,  और व्यापर को कैसे दुरुस्त किया जाए,  आने वाले समय के लिए कैसे मुलाज़िमों को तैयार किया जाए,  क्या  तरक़ीब  हो कि  बाकी बराबरी न कर सकें, इसी सब में उसके दिन-रात गुज़रते|  उसके काम करने का तरीका कुछ अलग ही था|  उसने  हर काम के लिए एक अलग आदमी  सहेज रखा था |  जो जितना ज़्यादा ख़ास उसको उतना संजीदा काम|  इस सब के बीच  आम खरीदार  से दूरी बढाती गयी|  बस ये ख़ास लोग ही माता जी और छोटे बेटे तक पहुँच पाते थे और  ज़रूरी नहीं कि बाहर चल रहा भाव ही अन्दर बताएं|  इन ख़ास लोगों की अपनी-अपनी उपाधि थी|  कोई लाइसेंस वाला था, कोई लाइज़नर, कोई  पट्टा वाला तो कोई कोटेदार,  कोई रियासत वाला तो कोई सियासतदार|  इन सब के आस-पास रहते एक महफ़िल सी थी|  माता जी दूरदर्शी थीं और वयापार में भविष्य अनिश्चित जानते हुए उन्होंने अब एक कंपनी बना दी थी|  सभी क़रीबी-ख़ास लोगों को  कद के मुताबिक़ ओहदा दिया गया था और छोटा बीटा इन लोगों से हिसाब-किताब करता था|    फिर एक दिन यकायक उसकी  एक दुर्घटना में मौत हो जाती है|  गलती किसकी थी, उसमें  जायेंगे तो समस्या होगी|  चश्मदीद कहते हैं  कि  माता जी इतने मज़बूत दिल की थीं कि बेटे के जाने पर भी एक आँसू न टपका| 

फिर कुछ समय बाद माता जी भी परलोक सिधार गयीं|  कारण में जायेंगे तो पूरे   पंजाब की नदियाँ सूख जाएँगी, जाने दीजिये|

#भईया_उवाच
#कम्पनी_रूल

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