एक कोने से आवाज़ आई,
"क्यूँ व्यर्थ खट रहे हो?"
"क्यूँ व्यर्थ खट रहे हो?"
पीछे मुड़ के देखा तो
टिमटिमाता हुआ दिया
एक कुटिल सी मुस्कान लिए
कनखियों से निहार रहा था।
टिमटिमाता हुआ दिया
एक कुटिल सी मुस्कान लिए
कनखियों से निहार रहा था।
कुछ ना सूझा ,
तो मैंने कहा कि
"खट नहीं रहा,
काम है ये मेरा।"
तो मैंने कहा कि
"खट नहीं रहा,
काम है ये मेरा।"
वो अब भी मुस्कुरा रहा था।
और फिर नहीं रहा गया,
तो जोड़ दिया -
"कम से कम
तुम्हारी तरह जल कर,
अपना अस्तित्व तो नहीं गवां रहा।"
तो जोड़ दिया -
"कम से कम
तुम्हारी तरह जल कर,
अपना अस्तित्व तो नहीं गवां रहा।"
वो अब भी मुस्कुरा रहा था;
लौ अब दूसरी ओर थी,
लौ अब दूसरी ओर थी,
और फिर,
एक धीमी सी आवाज़ सुनाई दी -
"हाँ,
पर इस जलने में
कुछ प्रकाश तो है,
कुछ अर्थ तो है।"
एक धीमी सी आवाज़ सुनाई दी -
"हाँ,
पर इस जलने में
कुछ प्रकाश तो है,
कुछ अर्थ तो है।"
बहुत सोचा,
पर फिर भी,
मैं अब निरुत्तर था...
पर फिर भी,
मैं अब निरुत्तर था...
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