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Thursday, 23 April 2015

कैसा मेरा देश ?

किसी   हाई-वे  की  उड़ती  धूल  सा,
        या कि  उसके  डिवाइडर  पे  बेमन   से  उगाये गए पौधों  सा,
पास  के  सोते  (स्रोत) पे मंडराते  पक्षी  सा,
        या कि  रात के  अँधेरे में  चाय  तलाशते   विद्यार्थी  सा,
सड़क पे बिछाए  जुगनुओं  के जाल सा,
        या कि   मन में कौंध रहे अनगिनत प्रश्नों के जंजाल सा,
उसी  हाई-वे  के किनारे  बसे किसी खानाबदोश ‘खानदानी हकीम’ सा,
        या कि पान-मसाला  औ   गुटखा बेचते उस परिचित से  बूढ़े सा,
चिलचिलाती धुप में पानी तलाशते उस ट्रक ड्राईवर सा,
        या कि बी.एम्. डब्ल्यू.  किनारे लगा के दिन में ही पेग  बनाते उस
‘डिप्रेस्ड’ रईसजादे सा,
भूख से बिलबिलाते उस नवजात सा,
        या कि उस नवयौवना  के दुर्भाग्यपूर्ण  गर्भपात सा,
बाल और दाढ़ी  बढ़ाये उस ढोंगी सा,
        या कि अपना जीवन न्योछावर कर अगली पीढ़ी  का संवारते उस योगी सा,
‘सीमित साधनों’  में आदर्शों को  ढोते उस शिक्षक  सा,
        या कि  पेपर लीक कर, हवेली  खड़ी  करते उस परीक्षक सा,
मिसाईलों  पर गर्व करते  उस अल्पज्ञ   नवयुवक  सा,
        या कि उसका अर्थ तक ना समझते उस रिक्शा-चालक सा,
ज़मीनी  मुद्दों को दरकिनार कर के भी एजेंडा खड़ा कर सकने वाले स्वयंभू नेताओं सा,
        या कि  उनके सामने  असहाय  से खड़े, फांसी लगाते युवाओं सा...?
क्या?  आखिर क्या है मेरा देश?
        ये सब,  और ऐसा ही बहुत कुछ...
या कि वो जो हमें  परोसा जाता है रोज़,
       365 चैनेलों  द्वारा, लिविंग रूम की  बड़ी सी L C D Screen  पर,  रोज़?

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