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Friday, 2 June 2017

चाय, असम से!

चाय,  असम से!


कल शाम जब चाय पीने बैठा,
तो मेरी 6 साल की भांजी पूछ बैठी,
“मामा, ये चाय कहाँ से आती है?”
मुझे लगा रसोई तो इसे पता है,
तो थोड़ा पीछे जाते हुए बोला,
कि  “बेटा पास की दुकान हैं ना, वहां से|”

वो पूरे बत्तीस दिखा के हंस पड़ी,
“अरे,  वो तो पता है मामा |
पर वो आती कहाँ से है?
मतलब बनती कहाँ है?”
“ओह!  बनती?
बनती  असम में है|”

“असम ? 
वो कहाँ है?”

मैंने कहा “सुदूर, उत्तर-पूर्व में |”
“जाना है क्या?”
ये पूछ के मैंने ठिठोली की|

उसने पूछा उसे सुदूर क्यूँ बोलते हैं?
“बहुत दूर है न,  इसलिए|”
“अमेरिका से भी दूर है क्या ?”
उसका बाल-सुलभ मन पूरे जोरों पर था|

मुझे हँसी आ गयी|  मैंने कहा
“नहीं-नहीं, अपने भारत में ही है|”

उसकी कुछ चिंता दूर हुई शायद
“अचछा, तब तो ठीक है|
तो आप तो इतना घूमते हैं,
आप तो गए होंगे?”

पूरे मूड में थी वो शायद,
“नहीं, उधर नहीं गया अभी तक|”

ये सुन के शायद थोड़ी निराश हुई वो,
और फिर खेलने में लग गयी|
कुछ देर बाद,
इधर-उधर भटक कर,
फिर आ धमकी |

पर वो चाय बनती कैसे है?
फैक्ट्री में बनती है क्या?
“नहीं,  पेड़ पे होती है|”

कडवी क्यूँ होती है?
“वो उसका नेचुरल टेस्ट है बेटा |”

काली क्यूँ होती है?
“काली नहीं होती, ज्यादा होने पे काली दिखती है|”

“पीने से लोग भी काले हो जाते हैं क्या?”
“नहीं बेटा |  ऐसा होता तो असम में सब काले होते|”

“तो वहां गोरे होता हैं क्या?”
“हाँ!”
“और बहुत बहादुर भी|
पूरे उत्तर-पूर्व के सभी लोग|”

आपसे भी ज्यादा?
“हाँ, मुझसे बहुत ज्यादा|”

तुम्हे पता है,
इंडियन आर्मी में बहुत सारे बहादुर सैनिक योद्धा हैं  
उत्तर-पूर्वी राज्यों से|
अच्छा|

ख़ुशी उसकी आँखों में थी अब|
और मैं  थोड़ा सुकून में,
कि अब शायद ना पूछे कुछ और|

पर इतना आसान कहाँ,
उसकी ज्ञान-क्षुधा को शांत करना|

फिर घूम-फिर के आई तो पूछने लगी,
“पर वो तो बस असम या उत्तर-पूर्व की रक्षा करते होंगे|”
मैंने कहा  “नहीं|  पूरे देश की करते हैं |”
“वो इतने दूर से आते हैं हमारी रक्षा के लिए?”
“हाँ|”

“तो चाय भी साथ लाते हैं?”
मुझे हंसी आ गयी|  मैंने कहा
“नहीं,  वो व्यापारी लाते हैं|”

“पर व्यापार तो प्रॉफिट के लिए होता है न?”
“दोनों अलग-अलग है बेटा|”

“ठीक है|  चाय वाले व्यापारी को तो प्रॉफिट मिला,
पर हमारे वीर सैनिक को क्या प्रॉफिट मिलता है?”

“उन्हें सैलरी मिलती है बेटा|”
“पर क्या वो उस प्रॉफिट के बराबर होती है?”

ये सुन मैं सोच में पड़  गया|
उत्तर न मिलता देख वो फिर से खेलने चली गयी|

बाहर आ कर देखा तो वो  झूले में  झूल रही थी|
और मैं उसके प्रश्न में...



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