बचाती फ़िरती है अपनी अस्मत वो कमसिन हर रोज़;
दम भरते हैं वो कि मेरे मुल्क में मर्द बहुत हैं ।।
चन्द सिक्कों में बिकते देखे ईमान यहाँ फुरसत से,
गुज़रते नुक्कड़ से सुना कि मेरे मुल्क में महंगाई बहुत है ।।
बहुत हंसती है उस शहीद फौजी की बूढी माँ,
सुनते हैं कि उसके दिल में दफ़्न दर्द बहुत है ।।
No comments:
Post a Comment