सुनो,
तुम्हें दिनों में इतवार होना था,
सालों और महीनों में नहीं,
हर हफ़्ते में एक बार होना था।
नहीं, इसलिये नहीं के फ़ुरसत से होंगे,
तुम्हें बस उन छः दिनों का इंतज़ार होना था।
जो उन छः दिनों के इकट्ठे बादल बरस पड़ने को हों
तुम्हें सातवें दिन का इक खुला आसमान होना था।
तुम नहीं उस कैलेंडर में छपा एक लाल नंबर भर,
तुम्हें पाकर अच्छा कोई बीमार होना था।
जब तक मिलेंगे खुल कर, तुम गुज़र लोगे,
पर खूबसूरती इसी में के बस दीदार होना था।
अब आ ही गए हो तो ठहरो, क्या कुछ है जल्दी,
क्यूँ वक़्त का पाबंद तुम्हें यूँ बेशुमार होना था...
सालों और महीनों में नहीं, तुम्हें
हर हफ़्ते में कम-से-कम एक बार होना था,
यकीं मानो,
तुम्हें दिनों में इतवार होना था...
और कुछ नहीं बस
तुम्हें दिनों में इतवार होना था...
#इतवार
#Sunday
No comments:
Post a Comment