आज चूँकि भारत-बन्द का
आह्वान था भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के द्वारा तो हमारे कार्यस्थल के बाहर कुछ
बल्लम-बेलचा धारी झुण्ड में बैठे
थे| अब इधर
हम भी कुर्सी तोड़-तोड़ के मोटे हो चुके हैं तो अब दौड़ने की झस बची नहीं है, इसलिए
भिड़ना बेवकूफी होती| यही सब गुणा-गणित करते पास की दुकान पर चाय पीने बैठ गये|
अब सब तो उत्पाती होते नहीं तो एक-दो एक्टिविस्ट (जैसा उनके मुँह से सुना),
कार्यकर्ता बेहतर लगता शायद, (अधेड़
उम्र के) लड़के आकर पास की पान की गुमटी पर धाक जमाने लगे
कि ‘सब बन्द करा दिया’ | पान वाले चाचा
शायद बिहार के थे जो कि कौतूहलवश पूछ बैठे “भाईना, ये बताइए
कि ये बन्द आप लोग कर किसलिए रहे
हैं?”
एक्टिविस्ट भाईना :
आज भारत-बन्द है इसलिए!
पान वाले चाचा : हाँ,
वो तो सुना, पर है क्यूँ?
एक्टिविस्ट भाईना :
अरे, अब है तो है !
पान वाले चाचा : हाँ , मान लिया| पर भाईना कारण तो होगा कोई ?
(इस पर भाईना चुप!)
(फ़िर बगल वाले चिंटू
ने धीरे से कुछ समझाया)
एक्टिविस्ट भाईना : हम लोग बढ़ते हुए पेट्रोल और डीज़ल के दामों के विरोध में ये बंद करवा रहे हैं|
पान वाले चाचा : तो क्या इस से पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम हो
जायेंगे|
(भाईना फिर चुप!)
एक्टिविस्ट भाईना : हाँ, और क्या | पार्टी का आदेश है और हमारे नेता ने कहा
है कि इसे सफल बानाना है|
पान वाले चाचा : तो सफल तो हो गया न| ये ऑफिस,
वो दुकानें बन्द करा दीं आप लोगों ने भाईना|
(ये सुन भाईना और
चौड़ीया गये|)
एक्टिविस्ट भाईना : हाँ तो और क्या? सफल करना ही था | उधर बड़े बाज़ार की तरफ तो कई बस-वस भी फोड़े हैं हमारे लड़के|
पान वाले चाचा : उस से क्या फायदा भाईना? कल उन्ही लड़कों को कॉलेज जाने में तकलीफ होगी जब बस नहीं मिलेगी|
एक्टिविस्ट भाईना : अरे, अब थोड़ी तकलीफ तो झेल ही सकते हैं| क्रांति ऐसे नहीं आती चाचा |
पान वाले चाचा : अच्छा तो आप क्रांति ले आयेंगे|
एक्टिविस्ट भाईना :
हाँ, बिलकुल|
पान वाले चाचा :
अच्छा| और इस बन्द और तोड़-फोड़ से कैसे
क्रांति आएगी?
एक्टिविस्ट भाईना : आयेगी चाचा,
आएगी| बस देखते जाओ| अभी तो बस पेट्रोल और डीज़ल के दाम कम करवाने
हैं|
पान वाले चाचा : वो कैसे होगा?
एक्टिविस्ट भाईना :
अरे चाचा, आप भी न बहुत सीधे हो| देखो,
ये ऑफिस बंद हुआ; लोग नहीं आये| गाड़ियाँ कम निकली सड़क पर| तो पेट्रोल कम खर्च हुआ | जब मांग कम होगी तो तेल कंपनियों को अपनी
बिक्री बढाने के लिए दाम और कम करने पड़ेंगे|
फिर धीरे-धीरे पेट्रोल के दाम कम हो जायेंगे|
पान वाले चाचा : और जो
बस-वस फोड़े हो भाईना आप, उसका कैसे सरोकार
है?
एक्टिविस्ट भाईना :
अरे चाचा! आप भी ना| जब बस फोड़ दी गयी तो बस भी नहीं चलेगी| और जब बस नहीं चलेगी तो पेट्रोल भी खर्च नहीं होगा| फिर दाम और कम
होंगे|
पान वाले चाचा : (अपने रेडियो की आवाज़ तेज़ कर दी और चुपचाप पान लगाने में व्यस्त हो गये |)
(बगल वाले चिंटू ने
फिर धीरे से कहा ‘भाईना, बस डीज़ल से
चलती है|’
उस के बाद उसने बाइक
स्टार्ट की और कब चला गया पता ही नहीं चला|)
और एक्टिविस्ट भाईना
अपना महंगा फ़ोन निकाल कर किसी को दुसरे मोहल्ले में एक-दो पेट्रोल वाली कार फोड़ने का निर्देश देने लगे...
(फ़ोन के वाल-पेपर में भाईना और उनके नेता की एक विजयी मुस्कान वाली तस्वीर लगी थी|)
#भारत_बन्द
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